ध्यात्म के शिखर पर बैठे दो-महान औघड़ संतों के परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो इस मूक-संवाद की मूक-भूमिका बहुत पहले ही तैयार हो चली थी ! किसी के आने..